What is the power of compounding?
कम्पाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि की शक्ति क्या है?
दोस्तों जिस दिन आप चक्रवृद्धि की शक्ति को समझ जाओगे उसी दिन वास्तविक जन्म होगा आपका पृथ्वी पर l
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क्या होता है power of compounding?
आइए जानते हैं आखिर क्यु अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसे दुनिया का आठवां अजूबा कहा?
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1. आइए समझते हैं कुछ उदाहरणों से l व एक कहानी के माध्यम से l
दोस्तों एक समय की बात है l एक राजा था वह काफी उदार और आध्यात्मिक था उसके राज्य में सभी प्रजा, साधु - संत सभी सुखी थे l राज्य में काफी धन संपदा भरी हुई थी l एक दिन उस राज्य के गणितज्ञ गुरु जो राज्य के सभी शिष्यों को गणित की विद्या देते थे उन्होंने ने अपने शिष्यों को चक्रवृद्धि की शक्ति यानि कि power of compounding को समझाने के लिए अपने शिष्यों के साथ राज दरबार में गया l राजा गुरु को देख काफी खुश हुआ l बोले गुरु जी कहिये कैसे आना हुआ l गुरु जी बोले बस दक्षिणा के लिए आए हैं l राजा बोले जो चहिये ले लीजिए सभी तो आपका ही है गुरु जी l गुरु जी बोले, नहीं राजन मैं जितना मांगू बस उतना ही चाहिए l राजा प्रेम पूर्वक बोले कहिये महाराज गुरु जी l राजा उसी समय चेस यानी शतरंज खेल रहे थे l गुरु जी की ध्यान उसी चेस बोर्ड पर जाता है और कहा है l राजन मुझे बहुत अधिक नहीं बस तुम्हारे चेस बोर्ड में जितने खाँचे बने हुए हैं मुझे प्रत्येक खाँचे मे एक के दो गुना करके अनाज के दाने चाहिए l चेस बोर्ड मे 32 खाँचे बने हुए हैं एक खाँचे मे एक अनाज के दाने, दूसरे खाँचे मे दो अनाज के दाने, तीसरे मे चार, चोथा में आठ, और पांचवे में 16 दाने इसी तरह बत्तीसो खाँचे मे दाने चाहिए l राजा मुस्कराते हुए बोले गुरु जी आप चाहें तो कुछ भी मांग सकते हैं l यहां तक कि आप मेरा प्राण भी ये क्या गुरु जी बस इतनी सी अनाज के दाने, इससे तो आपके एक शिष्य के भी पेट नहीं भरेंगे , गुरु जी मुस्कराते हुए बोले नहीं राजन मुझे आपके प्राण नहीं बस जितनी बताये हैं उतना अन्न दान दे दो मैं चला जाऊँगा l राजा ने तुरंत सैनिक को आदेश दिया l सुरू मे एक सैनिक गये मुट्ठी भड़ अनाज लाए उसे देख गुरु जी हंसे मन ही मन l एक सैनिक ने मुट्ठी भड़ अनाज से तो आधा चेस बोर्ड भड़ दिए l उसके बाद दो तीन सैनिक मिल के शतरंज के बीस बाइस खाँचे तो भड़ दिए उसके बाद 32 वा खाँचे तक आते आते सभी सैनिक राजा के पास आ के चिल्लाने लगे त्राहि मान - त्राहिमान राजन अनर्थ हो गया राजन बोले क्या क्या हुआ?
सेना पति बोले महाराज हमे गुरु जी से हमे माफी मांगने चाहिए क्योंकि हमारे राज्य के जितने भी अनाज के भंडार थे सभी खत्म हो गये महाराज l
राजा बोले क्या बक रहे हो सेना पति हमारे राज्य में एक चेस बोर्ड के खाँचों के बराबर भी दाने नहीं l ऐसा बोलते हुए वह बाहर जाते हैं और देखते हैं अनाजों का पाहाड़ बना पड़ा है मगर अभी भी कई खाँचे को भड़ाना बाकी है l
तभी सेना पति फिर बोलते महाराज उन्होंने जितने अनाज की मांग की है उतने तो आज तक पृथ्वी पर उगा ही नहीं महाराज l
राजन माफी मांगते हुए बोले ये क्या करिश्मा है गुरु जी गुरु जी बोले ये चक्रवृद्धि गणना है राजन l
ये गणितीय गणनाएं है l इसे ही कहते हैं power of compounding l
2.पुराने ज़माने में साहूकार गरीबों के ऊपर इसी विधि से शोषण करते थे l
पुराने ज़माने में साहूकार गरीबों के ऊपर इसी तरह से ब्याज दरों को बैठाते थे l जिसे चक्रवृद्धि ब्याज बोलते हैं l इस तरह के ब्याज दर में जो गरीब फाँसते उसका घर जमीन सभी बिक जाते थे फिर भी उसका कर्ज चुकता नहीं होता था l
पैसा ही पैसों को बुलाता है l
3. दोस्तों आपने काफी बार अक्सर सुना होगा बड़े लोग पैसों के लिए काम नहीं करते बल्कि पैसे बड़े लोगों के लिए काम करते हैं l इसका यहि मतलब है l की लगातार निवेश कर पैसों को काम पर लगा देते हैं l और कुछ समय बाद compounding इंकम आने शुरू हो जाते हैं l और एक बार जब compounding इंकम आने शुरू हो गये तो l आप लोगों ने ऊपर बढ़ा ही क्या होता है compounding का power.
4. आप भी ध्यान रखे कर्ज मे न फंसेl
मगर इस तरह के इंकम पर जरूर विशेष ध्यान दे l क्युकी की कोइ भी व्यक्ति compounding income के बिना धनी नहीं बन सकता है l
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